Azadi ka Amrit Mahotsav: 15 अगस्त को त‍िरंगे को 21 तोपें देंगी सलामी, इनमें एक खास स्वदेशी तोप भी शामिल

स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव में इसी साल 15 अगस्त को स्वदेश निर्मित एटीएजीएस होवित्जर के जरिए लाल किले से 21 तोपों की सलामी दी जाएगी।


नई दिल्ली: भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने पर मनाए जा रहे अमृत महोत्सव कार्यक्रम में पहली बार मेक इन इंडिया के तहत लाल किले से पूरी तरह स्वदेशी तोपों को सलामी दी जाएगी। अब तक स्वतंत्रता दिवस पर द्वितीय विश्व युद्ध के ब्रिटिश पाउंडर-गन से 21 तोपों की सलामी देने की परंपरा थी। इस साल पहली बार ब्रिटिश पाउंडर गन के साथ प्रोटो टाइप ऑफ एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) यानी स्वदेशी होवित्जर गन को भी सलामी दी जाएगी। इस प्रोटो टाइप गन को विशेष रूप से स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव (आजादी का अमृत महोत्सव) के लिए अनुकूलित किया गया है। स्वदेशी होवित्जर तोप मोदी सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम की पहली खेप होगी, जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। ATAGS हॉवित्जर दुनिया की पहली आर्टिलरी गन है, जो 45 किमी की दूरी से अपने लक्ष्य को भेदने में सक्षम है। स्वदेशी हॉवित्जर स्वचालित है और इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है।

एटीएजीएस है क्या

एटीएजीएस परियोजना की शुरुआत डीआरडीओ ने 2013 में की थी, जिसके तहत पुरानी तोपों को बदलने के लिए भारतीय सेना में 155 एमएस स्वदेशी तोपों को शामिल करने का उद्देश्य निर्धारित किया गया था। डीआरडीओ ने इसके निर्माण के लिए निजी क्षेत्र की दो कंपनियों टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और भारत फोर्ज लिमिटेड का भी सहयोग लिया। स्वदेशी हॉवित्जर गन सिस्टम में उच्च गतिशीलता है और इसे आसानी से तैनात किया जा सकता है।अन्य विशेषताओं में असिस्टेड पावर मोड, अत्याधुनिक संचार प्रणाली, स्वचालित कमांड और नियंत्रण प्रणाली शामिल हैं। यह रात के अंधेरे में भी अग्नि शक्ति के गुण से लैस है।


एटीएजीएस होवित्जर की ये खूबियां बनाती हैं खास

-स्वदेशी होवित्जर जोन 7 (अधिकतम रेंज) में बायमॉड्यूलर चार्ज सिस्टम की खूबी से भी लैस है. यह एक खास किस्म का गोला-बारूद होता है. किसी और गन सिस्टम में अभी तक यह क्षमता नहीं है.

-स्वदेशी होवित्जर के चैंबर में 25 लीटर की अधिक क्षमता है. फिलवक्त किसी भी देश की सेना में शामिल एटीएजीएस सिस्टम में यह क्षमता नहीं है.

-स्वदेशी होवित्जर को 45 किमी रेंज के लिहाज से डिजाइन और फिर तैयार किया गया. हालांकि ट्रायल के दौरान इसने 48 किमी से अधिक दूरी पर स्थित लक्ष्य को भी भेदने में सफलता प्राप्त की.

-भले ही स्वदेशी होवित्जर 15 अगस्त 2022 को अपना डेब्यू कर रही हो, लेकिन 2017 के गणतंत्र दिवस की परेड में इसका पहली बार प्रदर्शन किया गया था. उस समय आर्मामेंट्स एंड कॉम्बेट इंजीनियरिंग सिस्टम के महानिदेशक प्रवीण कुमार मेहता ने गर्वित शब्दों में कहा था, 'यह तोप इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि आप देश में हरसंभव विशिष्टताओं के साथ सर्वश्रेष्ठ तोपों का निर्माण कर सकते हैं जो किसी अन्य देश की इस वर्ग में निर्मित किसी भी समकालीन तोप की विशिष्टताओं से मेल खा सकती हैं.'

-एटीएजीएस 155एमएम/52 कैलिबर तोप है, जो इसे एक शक्तिशाली हथियार बनाती है. कैलिबर की लंबाई जितनी ज्यादा होगी, वह उतना ही स्थायित्व प्रदान करती है. यानी ऐसी तोप लंबी दूरी तक शत-प्रतिशत सटीकता से निशाना लगाने में सक्षम है.


-जो तोप जितनी लंबी होती है, उसे कहीं ले जाने में उतनी ही समस्या आती है. हालांकि उसके भार को आवागमन के लिहाज से अनुकूल बनाने के लिए ऑटो प्रोपल्शन मोटर का इस्तेमाल किया जाता है. एटीएजीएस का अलग-अलग स्थितियों और भू-स्थैतिक परिस्थितियों में परीक्षण किया गया. ऐसे में इसके आवागमन को लेकर भी कभी कोई परेशानी नहीं आने वाली.

-इस तरह के हथियार एक मिनट में 5 राउंड या 150 सेकंड में 10 राउंड फायर करते हैं, निरंतर लड़ाई में इसके जरिए एक घंटे में 60 राउंड फायर किए जा सकते हैं.

-इन खूबियों की वजह से एटीएजीएस भारतीय तोपखाने का केंद्रीय आधार बन सकती है. स्वदेशी तोप होने का एक बड़ा फायदा यह भी है कि किसी तरह की मरम्मत या खास परिस्थितियों के लिए बदलाव देश में ही संभव होगा. इससे अतिरिक्त समय और खर्च की भी बचत होगी.